Friday, October 31, 2008

टुकड़ों में घरोंदा बंटता जाएगा

हौसला आतंकियों का बढ़ता जाएगा
कारवां बीच रस्ते लुटता जाएगा।

सींचा था जिसको लहू से अपने
अब वो चमन उजड़ता जाएगा।

आँख अपनी खोल लो देशवासियों,
टुकड़ों में घरोंदा बंटता जाएगा।

अपने ही हुए हैं प्यासे खून के,
तसलीम किसको दोष देता जाएगा।

Wednesday, October 15, 2008

दीवाली

जीत की खुशियाँ, खुशी की जीत है।
जुबां-जुबां पर मिलन का गीत है।

हर गली, हर मोड़ पर छाया खुमार
घरों में निभानी कई रीत हैं।

बाज़ार में रौनक, गेहूँ के लिये तैयार खेत,
फिजां में मिट्टी के बर्तनों का संगीत है।

मौसम ने उतार फेंका गर्मी का लिबास
रात ने ठण्ड से लगायी प्रीत है।

मुन्ने की जिद आतिशबाजी के लिए,
गुड्डी ने कहा, कलेंडर ठीक है।

त्यौहार है मिलन, मोहब्बत का
हर तरफ़ रोशन खुशी के दीप हैं।