जीत की खुशियाँ, खुशी की जीत है।
जुबां-जुबां पर मिलन का गीत है।
हर गली, हर मोड़ पर छाया खुमार
घरों में निभानी कई रीत हैं।
बाज़ार में रौनक, गेहूँ के लिये तैयार खेत,
फिजां में मिट्टी के बर्तनों का संगीत है।
मौसम ने उतार फेंका गर्मी का लिबास
रात ने ठण्ड से लगायी प्रीत है।
मुन्ने की जिद आतिशबाजी के लिए,
गुड्डी ने कहा, कलेंडर ठीक है।
त्यौहार है मिलन, मोहब्बत का
हर तरफ़ रोशन खुशी के दीप हैं।
Wednesday, October 15, 2008
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1 comment:
बहुत बढिया!!!
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