हवा में जलती तिल्ली की तरह है जिंदगी
यह उसने मुझसे तब कहा था
जब
झंझावात में घिरा
वह मुस्करा रहा था।
वाकई,
जीतने की चाहत ने एक युग
जिया था
और
उस आखिरी शाम
होंठों की मुस्कराहट
आंखों की चमक ने
जैसे
कड़े शब्दों में कहा था
जलने की जिद में सुलगती
भीगी लकड़ी की तरह भी है
जिंदगी।
Saturday, May 9, 2009
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