Friday, October 31, 2008

टुकड़ों में घरोंदा बंटता जाएगा

हौसला आतंकियों का बढ़ता जाएगा
कारवां बीच रस्ते लुटता जाएगा।

सींचा था जिसको लहू से अपने
अब वो चमन उजड़ता जाएगा।

आँख अपनी खोल लो देशवासियों,
टुकड़ों में घरोंदा बंटता जाएगा।

अपने ही हुए हैं प्यासे खून के,
तसलीम किसको दोष देता जाएगा।

No comments: