Wednesday, October 15, 2008

दीवाली

जीत की खुशियाँ, खुशी की जीत है।
जुबां-जुबां पर मिलन का गीत है।

हर गली, हर मोड़ पर छाया खुमार
घरों में निभानी कई रीत हैं।

बाज़ार में रौनक, गेहूँ के लिये तैयार खेत,
फिजां में मिट्टी के बर्तनों का संगीत है।

मौसम ने उतार फेंका गर्मी का लिबास
रात ने ठण्ड से लगायी प्रीत है।

मुन्ने की जिद आतिशबाजी के लिए,
गुड्डी ने कहा, कलेंडर ठीक है।

त्यौहार है मिलन, मोहब्बत का
हर तरफ़ रोशन खुशी के दीप हैं।

Friday, October 10, 2008

न...न... रोना न

न... न...रोना न
जीवन अपना खोना न
आंसू बूंद संभाल जरा
इतना अच्छा सोना न।

बेसबब बातों से बच
निकाल जुबां से हरदम सच
मत अपना ही रख कायम
बोझ किसी का ढोना न।

जीना हंसकर रोज, हर पल
लौट के आया है कब कल
एक पहचान बनाकर चल
भीड़ में चलकर खोना न।

रिश्तों से रिश्ते जुड़ जाते
फूलों पर ही भंवरे आते
दोस्त बड़ी पूंजी हैं दोस्त
बीज ईर्ष्या के बोना न।

करने से कुछ भी हो जाता
रीते मन अपना भी जाता
खून-पसीना रंग पहचान
काम में जादू टोना न।