खामोश, पर ना
जिन्दा, पर ना
खुशी, पर ना
गम, पर ना
हाँ, पर ना
ना, पर ना
वाह! पर ना
आह! पर ना
जिद, पर ना
सहमति, पर ना
फ़िर, पर ना
अब, पर ना...
हाँ,
जुबां दिल की
हर हरक़त पर
हर आँख में
नूर हो या बेनूर
किसी से नहीं दूर।
Sunday, November 9, 2008
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1 comment:
good poem
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