उन्होंने पूछा था एक बार
औरत ही क्यों होती है शिकार
पतित्व के सवालों का
घर के हवालों का
भीड़ के बवालों का
जवाब नही किसी के पास
छूटते बस्ते का
टूटते रिश्ते का
भयानक रस्ते का
सिल गए होंट
औरत की जात पर
शौहर की बात पर
डूबती रात पर
कैसी सहानुभूति
बराबर के हक़ में
चरित्र के शक में
बेटी के पक्ष में
हाँ,
उन्होंने पूछा था एक बार
औरत ही क्यों होती है शिकार?
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Tuesday, June 24, 2008
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1 comment:
सही फरमाते हैं आप।
पर हमारा दुर्भाग्य, यह हमारी नियति बन गयी है।
कृपया कमेंट बाक्स से वर्डवेरीफिकेशन हटा दें, इससे असुविधा होती है।
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