बेखुदी है, बेरुखी या बेवफाई,
तेरी जानिब से मिले कुछ तो सफाई।
आज भी गुलशन है तेरा मुन्तजिर,
खुशबू तेरे प्यार की दिल में समाई।
राज दिल का हम से ही कुछ खोल दो,
कब तलक छुप-छुप के लोगे अंगड़ाई।
दर्द दिल का और भी बढ़ने लगा,
जब पवन चलने लगे पुरवाई।
कुर्ब तेरा था, गिले-शिकवे भी थे,
दूर जाकर तेरी याद खूब आई।
Wednesday, August 6, 2008
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